Mar 11, 2026

एमएसएमई सेक्टर में ₹17,743 करोड़ का निवेश: उत्तराखंड के छोटे उद्योगों ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था

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उत्तराखंड की विकास दर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7.23 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में प्राथमिक क्षेत्र कृषि, बागवानी व पशुपालन का 0.74 प्रतिशत योगदान है। यह खुलासा मंगलवार को विधानसभा पटल पर पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट से हुआ है। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने रिपोर्ट को सदन पटल पर रखा। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने वर्ष 2025-26 में विकास दर 7.23 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि 2024-25 के अंतिम अनुमान में 6.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी आंकी गई थी। प्रतिव्यक्ति आय 9.25 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 2.73 लाख से अधिक रहने का अनुमान है। राज्य गठन के बाद से प्रदेश के राजस्व संग्रहण में 51 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2025-26 में दिसंबर माह तक 9179.80 करोड़ का राजस्व संग्रहण किया गया। जबकि पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, नेचुरल गैस व शराब से 1878.65 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। विनिर्माण क्षेत्र में तीन गुना की वृद्धि हुई है। राज्य में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ी है। 2000 में कुल 15470 किमी सड़क थी, जो 43765 किमी हो गई है।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई क्षेत्र तेजी से उभरा है। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की संख्या 94595 पहुंच गई है। राज्य गठन के बाद से उद्योगों की संख्या में छह गुना व पूंजी निवेश में 25 गुना की बढ़ोतरी हुई है। एमएसएमई क्षेत्र में 17743 करोड़ का निवेश व 4.63 लाख लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 210 हो गई है। प्रदेश सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में सुधार किए हैं। नए मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों के उच्चीकृत से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। राज्य गठन के बाद से प्रदेश में संस्थागत प्रसव में 296.2 प्रतिशत की वृद्धि की है। वर्तमान में 83.2 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो रहे हैं। वर्ष 2030 तक सरकार ने एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर तैनात करने का लक्ष्य रखा है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशयलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश के 83097 किसानों को फसल बीमा से जोड़ा गया। दिसंबर 2025 तक 18365.18 हेक्टेयर में फसलों का बीमा कराया गया। इसकी कुल राशि 136.73 करोड़ है। मिलेट योजना के तहत 1.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाजों की खेती हो रही है। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1.5 मीट्रिक टन है। प्रदेश में 5.77 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किए गए।