Apr 12, 2026

स्थानीय चुनावों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने की आवश्यकता पर पंचायतीराज निदेशालय का आधिकारिक बयान

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देहरादून। उत्तराखंड में लंबे समय से खाली पड़ी पंचायत सीटों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। ग्राम पंचायत सदस्यों के सैकड़ों आरक्षित पदों पर अब आरक्षण खत्म कर उन्हें सामान्य श्रेणी में बदला जा सकता है। पंचायतीराज निदेशालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है, जिसके बाद इन सीटों पर तीसरी बार चुनाव कराने की तैयारी शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित ग्राम पंचायत सदस्य पदों में से बड़ी संख्या में सीटें खाली पड़ी हैं। दो बार चुनाव और उपचुनाव होने के बावजूद इन पदों पर उम्मीदवार नहीं मिले। वर्तमान में ग्राम पंचायत सदस्यों के 3846 पद, ग्राम प्रधान के 16 पद और क्षेत्र पंचायत सदस्य के तीन पद अब भी रिक्त हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई सीटों पर नामांकन ही नहीं हुआ, जिसके चलते पंचायतों का गठन अधूरा रह गया। यही वजह है कि अब इन पदों को सामान्य श्रेणी में बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, ताकि अधिक से अधिक उम्मीदवार चुनाव में भाग ले सकें और पंचायतों का गठन पूरा हो सके। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में 33 ग्राम प्रधान ऐसे हैं, जो निर्वाचित होने के आठ महीने बाद भी शपथ नहीं ले पाए हैं। इसका मुख्य कारण ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा न होना है। बिना वार्ड सदस्यों के पंचायत का विधिवत गठन संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उत्तराखंड में कुल 7817 ग्राम पंचायतें, 3195 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 402 जिला पंचायत सदस्य पद हैं। इनमें से कई पद खाली या अधूरे होने से पंचायत व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने भी इन सीटों को सामान्य करने की सिफारिश शासन को भेजी है। पंचायतीराज निदेशक निधि यादव ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर तीसरी बार चुनाव कराए जाएंगे। सरकार के इस कदम से उम्मीद है कि पंचायतों में लंबे समय से बनी प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी और ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।