Thursday, February 2, 2023
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कांस फिल्म फेस्टिवल में आर. माधवन की फिल्म ‘रॉकेट्री – द नांबी इफेक्ट’ का होगा वर्ल्ड प्रीमियर, ये मूवी भी मचाएंगी धमाल

नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज गुरुवार को कान्स फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की सूची जारी की है। इस सूची में रॉकेट्री का विश्व प्रीमियर भी शामिल है, जिसमें अभिनेता आर माधवन ने मुख्य भूमिका निभायी है तथा इसका निर्देशन भी माधवन द्वारा ही किया गया है। रॉकेट्री-द नांबी इफेक्ट का प्रीमियर जहां पलाइस के में होगा वहीं बाकी फिल्मों का प्रदर्शन ओलम्पिया थिएटर में किया जाएगा। जानिए कौन सी है वह फिल्में जो 75वें फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली हैं–

1.‘रॉकेट्री – द नांबी इफेक्ट’
निर्देशक: आर. माधवन
निर्माता: आर. माधवन
भाषा: हिंदी, अंग्रेजी, तमिल
यह हैं फिल्म की कहानी
रॉकेट्री- द नांबी इफेक्ट फिल्म में नांबी नारायणन के जीवन की कहानी को चित्रित किया गया है, जिसे एक टीवी कार्यक्रम में लोकप्रिय सुपरस्टार और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने एक साक्षात्कार में दर्शकों के सामने रखा था। कई महान व्यक्तियों की तरह, नांबी में भी कुछ कमियां हैं। अपनी प्रतिभा और जुनून के कारण उन्हें दुश्मनों और विरोधियों का सामना करना पड़ा। इन सभी बातों ने उन्हें एक आकर्षक आधुनिक नायक बना दिया।
फिल्म समाज में मौन रहते हुए उपलब्धि हासिल करने वाले तथा इससे आगे जाकर भी कुछ करने वाले व्यक्ति के जीवन का वर्णन करती है। यह फिल्म दर्शकों को विशेष योगदानकर्ताओं की पहचान करने और उन्हें सम्मान देने की जिम्मेदारी लेने की चुनौती देती है, चाहे वे नांबी नारायणन हों, या गरीब बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षक हों, या सीमा पर तैनात सैनिक हों, या दूरदराज के गांवों में सेवा देने वाले डॉक्टर हों, या जरूरतमंदों की मदद करने वाले स्वयंसेवक हों।


2. गोदावरी
निर्देशक: निखिल महाजन
निर्माता: ब्लू ड्रॉप फिल्म्स प्रा. लिमिटेड
भाषा: मराठी
यह है फिल्म की कहानी
यह निशिकांत देशमुख की कहानी है- जो एक नदी के किनारे अपने परिवार के साथ एक पुरानी हवेली में रहते हैं। पीढ़ियों से निशि और उनका परिवार किराया वसूल करने वाला रहा है। उनके पास शहर के पुराने हिस्से के आसपास काफी संपत्ति है।
इस परिवार के वर्तमान वारिस के रूप में, निशिकांत अपने जीवन से निराश हैं। वे पुराने शहर के तरीकों से नफरत करते हैं, वे अपने जीवन की तुच्छता से नफरत करते हैं, वे इस बात से भी नफरत करते हैं कि वे अक्षम रहे हैं- लेकिन अधिकांश भारतीय पुरुषों की तरह, वे अपनी नफरत को अपने अन्दर समाहित करते हैं और सारा दोष किरायेदारों व शहर जैसे कारणों को देते हैं, जिन्हें पूरी तरह से दोषमुक्त भी नहीं कहा जा सकता है। निशिकांत किराया वसूल करते हैं और नदी से दूर अपने छोटे से अपार्टमेंट में वीडियो गेम खेलते रहते हैं। वे अपनी पत्नी और बेटी को अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए छोड़कर, अपनी पारिवारिक हवेली से बाहर इस अपार्टमेंट में रहते हैं। वे अपना समय नदी और उसके साथ आने वाली सभी चीज़ों पर गुस्सा करने में बिताते हैं। वे जानते हैं कि उनका जीवन अर्थहीन हो चुका है।

3. अल्फा बीटा गामा
निर्देशक: शंकर श्रीकुमार
निर्माता: छोटी फिल्म प्रोडक्शंस
भाषा: हिंदी
यह हैं फिल्म की कहानी
इस फिल्म में निर्देशन के क्षेत्र में नायक जय का करियर निरंतर ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, जबकि उनका वैवाहिक जीवन संकट में है और वह अपनी प्रेमिका कायरा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उसकी पत्नी, मिताली- तलाक चाहती है ताकि वह अपने इंजीनियर प्रेमी रवि से शादी कर सके, जो कि उसके जल्द ही होने वाले पूर्व पति के उलट बेहद शांत और परवाह करने वाला है।
जब जय तलाक की बात करने के लिए आता है, तो रवि उस फ्लैट में मौजूद होता है जो कभी जय और मिताली का घर हुआ करता था। रवि यह महसूस करता है कि एक– दूसरे से विरक्त हो चुके दंपति के लिए उसके सामने तलाक पर चर्चा करना अजीब होगा। वह वहां से जाने का फैसला करता है।
लेकिन इससे पहले कि मिताली के जीवन में एक पुरुष दूसरे को रास्ता दे पाता, कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लग जाता है। अब प्रेम के वायरस से पीड़ित तीन व्यक्ति यह तय करने के लिए जूझते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और किस कीमत पर, वह भी तब जबकि उनके पास अपने भीतर झांकने के अलावा और कहीं जाने का विकल्प उपलब्ध नहीं है।

4. बूम्बा राइड
निर्देशक: बिस्वजीत बोरा
निर्माता: क्वाटरमून प्रोडक्शंस
भाषा: मिशिंग
यह हैं फिल्म की कहानी
गॉड ऑन द बालकनी के निर्देशक बिस्वजीत बोरा की बूम्बा राइड भारत की ग्रामीण शिक्षा प्रणाली में फैले व्यापक भ्रष्टाचार पर एक तीखा हास्य व्यंग्य है– और यह आठ साल के एक ऐसे लड़के (नवोदित इंद्रजीत पेगू, एक उल्लेखनीय भूमिका में) के बारे में है जो हेराफेरी करके खेल को अपने पक्ष में करना जानता है। एक सच्ची कहानी से प्रेरित, इस फिल्म को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर ज्यादातर गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ शूट किया गया है। इस फिल्म की कहानी एक साधनहीन स्कूल के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें केवल एक (अनिच्छुक) छात्र, बूम्बा है।

5. धुईं
निर्देशकः अचल मिश्रा
निर्माताः अचल-चित्र
भाषाः हिन्दी, मराठी

यह है फिल्म की कहानी

इस फिल्म में नायक पकंज अभिनेता बनना चाहता है और स्थानीय नगर निकाय के लिये नुक्कड़ नाटक करता है, ताकि अपना भरण-पोषण कर सके। उसके सपने बहुत बड़े हैं। वह अपने मित्र प्रशांत के साथ महीने भर में मुम्बई जाना चाहता है, जिसके लिये वह पर्याप्त बचत कर रहा है। लॉकडाउन के बाद उसके घर पर वित्तीय संकट आ पड़ा है और उसके सेवानिवृत पिता किसी नौकरी की तलाश में हैं।
वह दिन भर शहर में घूमता रहता है, थियेटर के अपने साथियों से मिलता है और उसके सीनियर लोग उस पर रौब जमाते रहते हैं। वह भी अपने जूनियरों को सलाह देता रहता है। मुम्बई के एक फिल्म-निर्माता से उसकी मुलाकात होती है, जिसका अप्रत्याशित नतीजा निकलता है। उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह तय कर लेता है कि वह अपनी सारी जमा-पूंजी दे देगा, ताकि उसके पिता को नौकरी न करनी पड़े।


6. ट्री फुल ऑफ पैरट्स
निर्देशकः जयराज
निर्माताः नवनीत फिल्म्स
भाषाः मलयालम

यह हैं फ़िल्म की कहानी
इस फ़िल्म में अभिनय करने वाला आठ साल का लड़का पूजन कोई साधारण बालक नहीं था। वह झील में मछली पकड़ने जैसे छोटे-छोटे काम करके अपना पेट पालता है और अपने परिवार की देखभाल करता है।

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