देहरादून। ऋषिकेश एम्स की तर्ज पर अब कुमाऊं क्षेत्र को भी स्वास्थ्य और आयुर्वेद के क्षेत्र में एक विश्वस्तरीय तोहफा मिलने जा रहा है। देवभूमि उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की राज्य सरकार की मुहिम रंग लाती दिख रही है। संस्थान को उधम सिंह नगर जिले के किच्छा (खुरपिया फार्म) में स्थापित करने के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई है।
उत्तराखंड में आयुर्वेद और समेकित चिकित्सा को नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने कुमाऊं क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा में संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र सरकार से इस पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटचा के समक्ष राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है। ऋषिकेश को विश्व की योग राजधानी के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त है और राज्य में आयुर्वेद चिकित्सा एवं शिक्षा का मजबूत आधार पहले से मौजूद है। ऐसे में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना उत्तराखंड को आयुष शिक्षा और शोध का राष्ट्रीय केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने संस्थान के लिए ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा स्थित खुरपिया फार्म में 50 एकड़ विवाद रहित भूमि चिन्हित कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। यह भूमि सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप है और संस्थान की स्थापना के लिए पूरी तरह उपयुक्त मानी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित स्थल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्क सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा निकट भविष्य में यहां विकसित होने वाले एम्स सैटेलाइट सेंटर के समीप होने के कारण यह क्षेत्र आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के समेकित स्वास्थ्य मॉडल का उत्कृष्ट केंद्र बन सकता है। इससे शोध, चिकित्सा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का मानना है कि संस्थान की स्थापना से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे उत्तर भारत के लोगों को उच्च स्तरीय आयुर्वेदिक उपचार, अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर भी सृजित होंगे। गौरतलब है कि इससे पहले हरिद्वार स्थित गुरुकुल आयुर्वेद कॉलेज को उच्चीकृत कर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आयुष मंत्रालय ने उसे स्वीकृति नहीं दी थी। अब राज्य सरकार ने रणनीति बदलते हुए किच्छा को नए केंद्र के रूप में प्रस्तावित किया है। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो कुमाऊं क्षेत्र को स्वास्थ्य और आयुष शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्थान उत्तराखंड को आयुर्वेद, योग और समेकित चिकित्सा के राष्ट्रीय मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने के साथ-साथ प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

