देहरादून। सोमवार को देहरादून के लोक भवन में एक बड़ा संवैधानिक अध्याय लिखा गया। उत्तराखंड के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई गई यह शपथ और राष्ट्रपति का नियुक्ति अधिपत्र इस बात का प्रतीक है कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्थाएं अपनी तय गति और गरिमा से चल रही हैं। मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मंत्रियों की मौजूदगी में हुआ यह आयोजन व्यवस्था की चुस्ती-दुरुस्ती को बयां करता है।
उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिल गया है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को देहरादून स्थित लोक भवन में राज्यपाल पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ दिलाई। इसके साथ ही डॉ. बिसेन ने राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी रही। शपथ ग्रहण समारोह से पहले मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति अधिपत्र पढ़कर सुनाया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. बिसेन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। राज्यपाल के आगमन को लेकर प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। इससे पहले उत्तराखंड पहुंचने पर जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर डॉ. बिसेन को पुलिस की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने पुलिस परेड का निरीक्षण भी किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान सहित अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। पेशे से चिकित्सक और कृषक रहे डॉ. बिसेन ने सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े डॉ. बिसेन ने मध्य प्रदेश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी काम किया। वर्ष 1990 से 2008 के बीच वह चार बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। अपने राजनीतिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने वन, परिवहन एवं खनिज तथा स्कूल शिक्षा एवं जेल विभागों में कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इन विभागों में उनके कार्यकाल ने उन्हें राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण पहचान दिलाई। राज्य की राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. बिसेन ने इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी कदम रखा। मई 2019 में वह 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। विधायक से लेकर राज्य सरकार में मंत्री और लोकसभा सदस्य तक का सफर तय करने के बाद अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के तहत महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है। राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में डॉ. बिसेन के अनुभव और उनकी नई भूमिका को लेकर राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों में रुचि बनी रहेगी। उत्तराखंड में उनके सामने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने के साथ राज्य की प्रशासनिक और विधायी प्रक्रियाओं में निर्धारित भूमिका निभाने की जिम्मेदारी होगी। राज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप समन्वय भी शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डॉ. बिसेन के शपथ ग्रहण के साथ उत्तराखंड में राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल की शुरुआत हो गई है। अब प्रदेश की जनता और राजनीतिक हलकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वह अपने अनुभव का उपयोग राज्य के संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में किस प्रकार करते हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. ढाल सिंह बिसेन के लिए उत्तराखंड का राज्यपाल पद एक नई संवैधानिक जिम्मेदारी है। उनके कार्यकाल में संविधान की मर्यादा, संस्थागत संतुलन और राज्यहित से जुड़े विषय महत्वपूर्ण रहेंगे।

