Tuesday, January 31, 2023
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किसाऊ बांध बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड के विकास हेतु मील का पत्थर- मुख्यमंत्री धामी,( पढ़ें पूरी खबर)

किसाऊ बांध बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड के विकास हेतु मील का पत्थर- मुख्यमंत्री धामी,( पढ़ें पूरी खबर)

जीवन पांडे-
एशिया की दूसरी सबसे बड़ी बांध परियोजना किसाऊ बांध बहुउद्देशीय परियोजना की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य का पक्ष रखा,

मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ एक बैठक सांझा की जिसमें उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास व जन कल्याण हेतु समय-समय पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से क्षेत्र विशेष हेतु लाभप्रद योजनाएं विकसित की जाएंगी ,जिससे पलायन की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा,

वहीं मुख्यमंत्री ने परियोजना डीपीआर की लागत बढ़ाने की दिशा में विद्युत घटक लागत को स्थिर रखा जाए इस पर जोर दिया तथा बढ़ी हुई विद्युत घटक लागत को अन्य चार लाभार्थी राज्य उत्तर प्रदेश ,हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली द्वारा बहन किया जाए,

ताकि राज्य के उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सके, वही इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बैठक में वर्चुअल प्रतिभाग किया,

परियोजना पर नजर-
-2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था,

  • एशिया की यह सबसे बड़ी बांध परियोजना है जिसकी ऊंचाई 236 मीटर एवं लंबाई 680 मीटर होगी,
  • परियोजना देहरादून वह हिमाचल के सिरमौर में टोंस नदी पर प्रस्तावित है,

सार-
इस परियोजना से 1324 एमसीएएम जीवित भंडारण द्वारा 97076 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 617 एमसीएम पेयजल एवं औद्योगिक उपयोग हेतु जल प्राप्त होगा ,जिससे उत्तर प्रदेश, हरियाणा ,राजस्थान की सिंचाई आवश्यकता तथा दिल्ली की पेयजल आवश्यकता की पूर्ति की जा सकेगी, वहीं 660 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन होगा जिससे 1379 एमयू हरित विद्युत ऊर्जा प्राप्त होगी ,जो कि उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश को बराबर बराबर मिलेगी,

17 गांव के 6 हजार लोग होंगे विस्थापित-
एक रिपोर्ट के अनुसार बांध निर्माण से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की 2950 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी, तथा 17 गांव के 6 हजार से अधिक लोगों के निवास विस्थापित होंगे, वही गौरतलब यह है कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री कार्यालय में इस मुद्दे पर हुई बैठक मैं फैसला किया गया था कि परियोजना लागत के घटकों का विभाजन इस तरह से किया जाए ताकि प्रभावित राज्यों के प्रतिकूल प्रभाव की भरपाई आसानी से हो सके,

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