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चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में हेलिकॉप्टर उड़ानों की निगरानी और कड़ी की गई

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जोशीमठ/देहरादून। चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में शुक्रवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलिकॉप्टर में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शवों को निकालने के लिए सुरक्षाबलों का संयुक्त रेस्क्यू अभियान शनिवार को भी जारी रहा। शुक्रवार देर रात ही सेना के जवानों ने शवों को अपने संरक्षण में ले लिया था, लेकिन बीहड़ पहाड़ी ढलानों, घने अंधेरे और बेहद दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शवों को मुख्य सड़क तक नहीं लाया जा सका। अत्यधिक जोखिम को देखते हुए रात में अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। शनिवार तड़के भारतीय सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के राहत दल दोबारा मौके पर पहुंचे। दुर्घटनास्थल से निकटतम सड़क संपर्क करीब 10 से 12 किलोमीटर की खड़ी और पथरीली पैदल दूरी पर है। प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, हादसे की भीषणता के कारण शव क्षत-विक्षत हालत में हैं, जिससे जवानों को उन्हें स्ट्रेचर के सहारे खड़ी चढ़ाई से सड़क तक लाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। टीमें पूरी सतर्कता और सुरक्षा के साथ शवों को सुरक्षित नीचे लाने में जुटी हैं। इस दर्दनाक हादसे की विस्तृत तकनीकी जांच के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की संयुक्त विशेषज्ञ टीम शनिवार को उत्तराखंड पहुंच रही है। जांच दल मलबे का मुआयना करने के साथ ब्लैक बॉक्स/फ्लाइट डेटा, मौसम के आंकड़े और एटीसी संदेशों का विश्लेषण कर दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाएगा। यह इस वर्ष चारधाम यात्रा के अंतिम चरण का पहला बड़ा हेलिकॉप्टर हादसा है। पिछले वर्ष (2025) यात्रा के दौरान कुल पांच हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें उत्तरकाशी और केदारघाटी में हुए दो हादसों में पायलट समेत 13 लोगों ने जान गंवाई थी, जबकि तीन अन्य घटनाओं में इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुए थे। इन हादसों के बाद डीजीसीए और राज्य सरकार ने संचालन के लिए सख्त एसओपी बनाई थी। सोनप्रयाग और सहस्रधारा में एटीएस व सीसीटीवी प्रणाली लगाने के साथ मौसम खराब रहने पर उड़ानों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके बावजूद हुए इस ताजा हादसे ने एक बार फिर उच्च हिमालयी उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था और मौसम जनित जोखिमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।