राधा गायत्री मौत विवाद: पुलिस की भूमिका पर परिवार के सवाल

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मसूरी। मसूरी में गुरुग्राम की सॉफ्टवेयर इंजीनियर राधा गायत्री की संदिग्ध मौत के मामले में शनिवार को उस समय भावुक माहौल बन गया, जब मृतका के पिता पारुपुडी सुधाकर मसूरी कोतवाली पहुंचे और पुलिस पर मामले में सहयोग न करने तथा जांच को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बेटी को न्याय नहीं मिला तो वह कोतवाली के बाहर ही अपनी जान दे देंगे। मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की संदिग्ध मौत के बाद से वह लगातार पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे सामान्य घटना की तरह प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की छवि को भी नुकसान पहुंचाया गया, जबकि वह किसी प्रकार का नशा या शराब का सेवन नहीं करती थी।
परिजनों का आरोप है कि वे लगातार हत्या की आशंका जता रहे थे, लेकिन इसके बावजूद मुकदमा दर्ज करने में देरी हुई। पिता ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि मामले में लीपापोती की जा रही है और कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी की निगरानी में कराई जाए। कोतवाली परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान पिता भावुक हो गए और कहा कि अगर मेरी बेटी को न्याय नहीं मिला तो मैं यहीं पुलिस स्टेशन के बाहर मर जाऊंगा, लेकिन अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई नहीं छोड़ूंगा। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार परिजनों की तहरीर के आधार पर हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर परिजनों को अपनी बात सुने जाने के लिए धरने और आत्मघाती चेतावनी तक क्यों पहुंचना पड़ा। वहीं अब पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है।