ग्रामोत्थान परियोजना से गांवों में विकास की लहर: स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनी उत्तराखंड की मातृशक्ति

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की 'ग्रामोत्थान परियोजना' और विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं ने प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्वावलंबन का नया सवेरा ला दिया है। आज उत्तराखंड की महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि वे प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को धरातल पर उतारने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

राज्य में संचालित 'रीप परियोजना' महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके माध्यम से ग्रामीण मातृशक्ति को पोल्ट्री फार्मिंग, लघु उद्योग और अन्य छोटे व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो ग्रामोत्थान परियोजना के तहत जुड़ी महिलाएं अब प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये तक की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवारों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आया है। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को सही बाजार और दाम दिलाने के लिए सरकार ने 'हिलांस पहाड़ी स्टोर' के रूप में एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इससे स्थानीय उत्पादों की पहुंच न केवल प्रदेश के शहरों तक, बल्कि पर्यटकों के बीच भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने 'वोकल फॉर लोकल' का आह्वान करते हुए स्थानीय होमस्टे और स्वयं सहायता समूहों को विशेष प्राथमिकता दी है, जिससे रिवर्स माइग्रेशन (गांवों की ओर वापसी) को भी बल मिल रहा है। मुख्यमंत्री धामी का मानना है कि राज्य का सर्वांगीण विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। इसीलिए आर्थिक मजबूती के साथ-साथ उनके राजनीतिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को ऐतिहासिक बताते हुए सरकार उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका के लिए निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। आज उत्तराखंड की महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर राजनीति, स्वरोजगार और समाज सेवा में अपनी पहचान बना रही हैं।