Monday, May 20, 2024
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पत्रकार सौम्य विश्वनाथन हत्याकांड के मामले में साकेत कोर्ट ने पांचों आरोपियों को सजा करार दिया

दिल्ली : साकेत कोर्ट में आज, 2008 में टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले (Soumya Vishwanathan Murder Case) में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पाण्डेय ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है। साकेत कोर्ट ने वसंत कुंज थाने में 302/34 आईपीसी, 411 आईपीसी, मकोका के 3(1)(i), 3(2), 3(5) की धाराओं में दर्ज सौम्या विश्वनाथन हत्या मामले में चार आरोपितों को हत्या के संगठित अपराध का दोषी करार दिया। अजय सेठी को केवल 411 आईपीसी, मकोका के 3(1)(i), 3(2), 3(5) की धाराओं में दोषी करार दिया गया।



आरोपियों को 26 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी, जब अदालत में तय की जाएगी कि किसे कैसी सजा दी जाएगी। मृतका सौम्या विश्वनाथन के पिता एमके विश्वनाथन और माता माधवी विश्वनाथन भी मौजूद हैं। आरोपित अमित शुक्ला की ओर से दाखिल की गई अंतरिम जमानत की एक याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले के बारे में, 30 सितंबर, 2008 को सुबह लगभग 3.30 बजे, वे काम से घर लौटते समय गोलियों से मारकर हत्या कर दी गई थीं। पुलिस ने दावा किया कि इस हत्या के पीछे डकैती का मकसद था, लेकिन पांच लोगों – रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को उनकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और वे मार्च 2009 से हिरासत में थे।

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ सख्त महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया था। बलजीत और दो अन्य – रवि कपूर और अमित शुक्ला को पहले 2009 में आइटी एग्जीक्यूटिव जिगिशा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था।

हत्या के मामले का पर्दाफाश हुआ था, जब पुलिस ने बताया कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार से विश्वनाथन की हत्या के मामले का पर्दाफाश हुआ। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में जिगिशा घोष हत्या मामले में कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सजा और बलजीत मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि अगले वर्ष उच्च न्यायालय ने रवि कपूर और अमित शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और जिगिशा हत्या मामले में बलजीत मलिक की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।

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